अर्गला

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युवा प्रतिभा

अंशुल महाजन

एहसास अपनों का

स्मृति बहुत ही गरीब घर की परंतु सुशील लड़की थी. वह दिल्ली के एक कार्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत थी. उसका छोटा सा परिवार था, दो बच्चे राहुल और कीर्ति और उसकी बूढ़ी माँ. उसका पति से तलाक़ हो चुका था जिसके कारण वह अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी. उसका तथा घर का खर्चा बड़ी कठिनाई से चल पाता था. बच्चों का नाश्ता बनाकर उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना और स्कूल भेजकर सारे काम निपटा कर ऑफिस जाना यह उसकी दिनचर्या थी.

एक दिन राहुल ने अपनी माँ से पूछ ही लिया, 'माँ मेरे पापा कहाँ हैं? मुझे उनसे मिलना है क्योंकि सबके पापा आते हैं.' परंतु स्मृति ने यह कह कर टाल दिया कि उसके पापा उसे छोड़कर चले गये हैं. और बेचारी क्या बताती? वो तो अपने बच्चों को बाप के साये से भी दूर रखना चाहती थी. बच्चे सो गये. वह अपनी पुरानी बीती यादों में खो गयी. जब वह कालिज में पढ़ती थी और कक्षा में अव्वल आती थी. उसकी कक्षा में सुबोध नाम का एक लड़का पढ़ता था. वह स्मृति को बहुत पसंद करता था. वह भी उसे पसंद करती थी. हैंडसम, स्मार्ट और सभी लड़कों से अलग.

कालेज में विदाई समारोह चल रहा था. इसी दौरान सुबोध ने स्मृति से शादी का ऑफर रखा. स्मृति ने हामी भर दी. उनके माँ-बाप ने उसकी सगाई कर अगले माह की दस तारीख को शादी का मुहूर्त निकलवा लिया. शादी हो गई और दोनों सुख पूर्वक रहने लगे. स्मृति ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया - राहुल और कीर्ति. मगर स्मृति को क्या मालूम था कि उसके जीवन में ऐसा मोड़ भी आयेगा कि सुबोध उसे छोड़ देगा.

सुबोध प्रतिदिन लेट आता और शराब पीकर स्मृति से मारपीट करता. यह उसका प्रतिदिन का काम हो गया था. एक दिन तो उसने हद ही कर दी कि वह अपने साथ किसी लड़के को घर ले आया और स्मृति से गाली-गलौच कर घर से निकल जाने के लिए कह दिया. जब से अब तक वह बच्चों को लेकर अपनी माँ के घर रहकर एक छोटी सी नौकरी से खर्चा चलाने लगी. स्मृति से कभी-कभी सुबोध के दोस्त हरकिशन मिलने आते रहते तथा सुबोध के बारे में सूचना देते रहते.

एक दिन उन्होंने स्मृति को बताया कि सुबोध को अपनी ग़लती का एहसास हो गया है और आप घर चलिये. मगर स्मृति जाना नहीं चाहती थी जब तक सुबोध खुद लेने नहीं आयेगा. वह इतना कह कर चुप हो गई. हरकिशन ने बताया कि उस लड़की ने सुबोध को बर्बाद कर के रख दिया है. उसने भी तलाक ले लिया है और अपना हिस्सा माँग रही है. सुबोध बहुत अकेला पड़ गया है.

स्मृति को यह सुनकर बड़ा दु:ख हुआ पर वह मजबूर थी कि जब तक सुबोध को अपनी ग़लतियों का एहसास नहीं हो जाता और आकर उससे माफी माँग कर खुद लेने नहीं आयेगा वह नहीं जायेगी.

एक दिन सुबह-सुबह स्मृति के यहाँ आकर एक गाड़ी रुकी. स्मृति यह देखकर चौंक गई कि कौन आया है? सुबह-सुबह देखा हरकिशन जी तथा सुबोध आये हैं. सुबोध को देखकर वह खड़ी की खड़ी रह गई. सुबोध उसके सामने आया और गिड़गिड़ा कर माफी माँगने लगा. सुबोध को गिड़गिड़ाता देख स्मृति की आँखें भर आयी. स्मृति ने कहा, 'चलो तुम्हें एहसास तो हुआ अपनी ग़लती का.' सुबोध ने कहा बच्चे कहाँ हैं? चलो अपने घर. सुबोध स्मृति और बच्चों को साथ ले अपने घर चला गया तथा सुखी जीवन व्यतीत करने लगा.

© 2009 Anshul Mahajan; Licensee Argalaa Magazine.

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