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अनिल पु. कवीन्द्र एवं संध्या नवोदिता: मेरा पहला सवाल आपसे है कि पहले जो पचपन बरसों से कश्मीर को दी गयी प्रति व्यक्ति केन्द्रीय सहायता बिहार से 14 गुना, तमिलनाडृ से ग्यारह गुना और असम से छः गुना अधिक रही है। कश्मीर को सहायता का 90 प्रशित अनुदान यानि ग्रान्ट के रूप में मिलता रहा है शेश 10 प्रतिशत ऋण के रूप में जबकि अन्य राज्यों में यह ग्रान्ट 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत है। सवाल है कि जो रकम ......
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अनिल पु. कवीन्द्र एवं संध्या नवोदिता: आपने अपनी इस ज़िंदगी में तमाम जन-आन्दोलन देखे, आपके पहले की पीढ़ी ने कई जन-आन्दोलनों में हिस्सा लिया. आप इन तमाम अनुभवों को और संघर्ष को किस तरह से देखती है ?
सुचेता गोइंदी: मेरे ज़्यादातर अनुभव आज़ादी के बाद के दिनों के हैं और मेरे अनुभव तो निहायत सकारात्मक रहे हैं. जब मैं शिक्षा में थी उस वक्त शिक्षण संस्थानों में बहुत अनाचार फैलने लगा था. मैं अकेली लेक्चरर थी. गुंडागर्दी ......
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अनिल पु. कवीन्द्र एवं संध्या नवोदिता: हम आपको ध्यान दिलाना चाहेंगे कि अन्ना के आन्दोलन में दो चीजें हुईं- एक, अन्ना और उनके सहयोगी मिलकर के काम कर रहे थे. दूसरा ये जो लोग उनके साथ में आये कई लोग ऐसे थे जो अन्ना को नहीं जानते थे. आप भी शायद इसके पहले नाम नहीं जानते रहे होंगे हम तो बिलकुल भी नहीं जानते थे. छोटे-छोटे पर्चे बांटे गए थे कि अन्ना कौन हैं. उसमें कुछ पंक्तियों में आना का ......
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अनिल पु. कवीन्द्र एवं संध्या नवोदिता: इस समय भारत सहित दुनिया भर में वो कौन से मुद्दे हैं, जिन पर प्राथमिक स्तर पर लड़ा जाना चाहिए? आपका क्या नजरिया है?
बनवारी लाल शर्मा: इस समय दुनिया में जो मूल समस्या है, उसके खिलाफ लड़ना चाहिए ही नहीं, लड़ाई शुरू हो चुकी है. ये शुभ लक्षण है. पिछले चार साल में पश्चिम ने संयुक्त राष्ट्र अमरीका में जो मंदी का दौर शुरू हुआ. आर्थिक लोन का भी संकट चला. ......
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अनिल पु. कवीन्द्र एवं संध्या नवोदिता: आप लंबे समय से जनता के बीच काम कर रहे हैं.. आन्दोलन, और जन-मुद्दों पर आप खूब सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. मौजूदा समय में भारत में आप मूलतः क्या बुनियादी मुद्दे देखते हैं ?
हिमांशु कुमार: अमीर देशों के अमीरों द्वारा दुनिया के संसाधनों को मुनाफे के लिये हड़पने का जो सिलसिला नब्बे के दशक में शुरू हुआ था वो अब एक खूनी दौर में प्रवेश कर चुका है. लोगों की ......
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