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  • गंगाप्रसाद विमल जी को याद करते हुए

    गंगाप्रसाद विमल जी को याद करते हुए

    गंगाप्रसाद विमल सर को यूं देखते रहना मानो पूरी दुनिया को पवित्र आंखों से देखने जैसा अहसास है। विमल सर जैसा अक्ष नक्श और वुजूद मानो बीहड़ में खिले फूलों का पर्वतशिखर उमगा हो। नदी बह रही हो मद्धम मद्धम। हवा में फैली हो एक खुशबू। आसमान में सारे नक्षत्र आपस मे हंसी ठिठोली करते…

  • रू-ब-रू किताब

    रू-ब-रू किताब

    रू-ब-रू किताब साक्षात्कारों पर आधारित है इसमें नीलाभ, नासिरुद्दीन शाह, शम्शुर्रह्मान फारुकी राजेन्द्र यादव के साक्षात्कार हैं इस पर मेरे द्वारा लिया गया एक लम्बा साक्षात्कार शामिल है. शुक्रिया नीलाभ जी ….

  • समयान्तर पत्रिका – नवम्बर 2015 अंक

    समयान्तर पत्रिका – नवम्बर 2015 अंक

    ‘समयान्तर’ पत्रिका नवम्बर अंक में मेरा लेख “दलित मासूमों की हत्या” पढ़ें. आप सभी मित्रों की प्रतिक्रया का इन्तजार रहेगा. विशेष रूप से समयान्तर के सम्पादक पंकज बिष्ट जी का हृदय से आभार.

  • सबलोग अक्टूबर अंक

    सबलोग अक्टूबर अंक

    सबलोग अक्टूबर अंक में मेरा लिखा “अख़लाक़ की हत्या के बाद” लेख प्रकाशित हुआ. आप भी पढ़ें और अपनी राय से अवगत कराएं. किशन कालजयी सर और राजन जी का शुक्रिया.