ब्लॉग
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आदिम आवाजें पर जितेन्द्र पात्रो की समीक्षा
“कलम और कविताएं संस्कृति को दर्शाती है, बीते हुए कल को आज से जोड़ती है। बीता हुआ कल ही तो आज की नींव रखता है। जिसकी नींव जितनी मजबूत वह वृक्ष उतना ही विशाल एवं उदार होता है। सफल सामाजिक विकास के लिए भूतकाल से प्रेरणा लेकर यथार्थ को समझना भी ज़रूरी है अनिल पुष्कर…
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साहित्य अकादेमी – वेबलाइन साहित्य श्रृंखला
साहित्य अकादेमी – वेबलाइन साहित्य श्रृंखला के अंतर्गत बहुभाषी कवि सम्मलेन
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गंगाप्रसाद विमल जी को याद करते हुए
गंगाप्रसाद विमल सर को यूं देखते रहना मानो पूरी दुनिया को पवित्र आंखों से देखने जैसा अहसास है। विमल सर जैसा अक्ष नक्श और वुजूद मानो बीहड़ में खिले फूलों का पर्वतशिखर उमगा हो। नदी बह रही हो मद्धम मद्धम। हवा में फैली हो एक खुशबू। आसमान में सारे नक्षत्र आपस मे हंसी ठिठोली करते…
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यश प्रकाशन द्वारा नवलेखन उपक्रम के लिए डॉ. अनिल पुष्कर को चुना गया
डॉ. अनिल पुष्कर को यश पब्लिकेशन द्वारा नवलेखन उपक्रम के लिए चुना गया है। उनका उपन्यास अर्गला जल्द ही यश प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जाएगा। 50 से अधिक प्रविष्टियाँ थीं, जिनमें से केवल 45 को यश प्रकाशन द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करते हुए पाया गया। तीन फाइनलिस्ट थे – डॉ. अनिल पुष्कर (उपन्यास), कमलेश…
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राजधानी लोकोदय प्रकाशन से प्रकाशित
इंसान के होने का पहला दस्तावेज़ केवल कविता ही रही । कविता में ही इंसान के वजूद में आने की पहली पहचान मिलती है। अगर आप किसी ब्रह्मांड किसी अन्यान्य सृष्टि और उसके सर्जक को मानते हैं तो उसे भी कविता ही पहली बार मूल अस्तित्व और मूल पहचान के साथ धरती पर लेकर आई।…
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रू-ब-रू किताब
रू-ब-रू किताब साक्षात्कारों पर आधारित है इसमें नीलाभ, नासिरुद्दीन शाह, शम्शुर्रह्मान फारुकी राजेन्द्र यादव के साक्षात्कार हैं इस पर मेरे द्वारा लिया गया एक लम्बा साक्षात्कार शामिल है. शुक्रिया नीलाभ जी ….
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समयान्तर पत्रिका – नवम्बर 2015 अंक
‘समयान्तर’ पत्रिका नवम्बर अंक में मेरा लेख “दलित मासूमों की हत्या” पढ़ें. आप सभी मित्रों की प्रतिक्रया का इन्तजार रहेगा. विशेष रूप से समयान्तर के सम्पादक पंकज बिष्ट जी का हृदय से आभार.
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सबलोग अक्टूबर अंक
सबलोग अक्टूबर अंक में मेरा लिखा “अख़लाक़ की हत्या के बाद” लेख प्रकाशित हुआ. आप भी पढ़ें और अपनी राय से अवगत कराएं. किशन कालजयी सर और राजन जी का शुक्रिया.