एक अद्भुत शख्सियत का विदा होना
एक अद्भुत रहस्य की तरह होता है
वो अद्भुत रहस्य जो लगता है पृथ्वी में है
वो अद्भुत पृथ्वी जो कुदरत में है
वो अद्भुत कुदरत जो प्राण में है
वो अद्भुत प्राण जो सृष्टि में है
वो अद्भुत सृष्टि जो ब्रह्माण्ड में है
वो अद्भुत ब्रह्माण्ड जो नक्षत्रीय है
वो अद्भुत नक्षत्र जो नभ में है
वो अद्भुत नभ जो अनंत में है
वो अद्भुत अनंत जो आकाशगंगा में है
वो अद्भुत आकाशगंगा जो अनंत आकाशगंगाओं में है
वो अद्भुत आकाशगंगाये जो अनंत अनंत तक हैं
वो अद्भुत अनन्त जो अब आप की रूह में समाया है
वो अद्भुत रूह जो न तो जल सकती है
वो अद्भुत रूह जो न तो पिघल सकती है
वो अद्भुत रूह जो न तो प्राण हीन है
वो अद्भुत प्राण जो न तो किसी के वश में है
वो अद्भुत संगम जो आप के भीतर समाया है
वो अद्भुत आत्म तत्व जो हम सबका एक है
वो अद्भुत सन्नाटा वो विरासत अब भी बची है
वो यादें वो कठिन स्थिति में कुछ कहना बचा है
वो अद्भुत उपायों के बाद भी इस तरह बने रहना
वो तुम्हारे साथ साथ ही बने अद्भुत दृश्य अब भी हैं
अब विदाई के समय में ही नहीं हो रहा है मुझसे
विदा कहना
अब जुदा होने के साथ-साथ भी बंध रहा है नाता
अब एक अद्भुत विराटता का हवन हो ने को है
अब एक अद्भुत मंत्र सीने में उतर कर रोने को है
अब एक एक श्लोक का अर्थ यही एक दूसरे का है
अब अद्भुत के इस समारोह में उपस्थित होने को है
एक अद्भुत उजाला एक नेह
एक अद्भुत एक निष्कलुष देह
एक और गीत में एक और राग
एक अद्भुत बाद तक फैला विराग
एक कण के साथ साथ जिए जो भी
एक अद्भुत क्षण के साथ साथ जिए जो भी
मैं उन्हीं की तरह ही एक मात्र एक ही समय हूँ
कि इस अद्भुत अविस्मरणीय वक्त के बाद कुछ हो
कि इस अद्भुत संगम के साथ साथ कुछ तो हो
कि एक बार फिर से शुरू हो ये होने की तमन्ना
कि तुम अद्भुत की तरह आओ हम से भी पहले
तुम इस अद्भुत हम मे समा जाओ हमसे भी पहले
तुम्हें कैसे विदा दें मेरे पूज्य मेरे जीवन
तुम्हें कैसे चूम लें कि गले लगाएं कैसे
तुम्हें कैसे बुलाएं कितनी सिद्दत कैसे
तुम्हें याद करते हुए अद्भुत का खयाल है
वो अद्भुत है कि आदमी है
वो आदमी है कि अद्भुत है
मैं सारे संसार से विदा लेकर आऊँ
तब तक तो रुको तब तक इंतजार करो
ये क्या हुआ तुमको मेरे मन का स्वामी माना
ये सुगंध से पहले ही नहीं रहा गुल से रिश्ता
वो गुलज़ार करने का दम तोड़ कर न जा
यूँ हसीन शाम ऐसे श्मशान कर के न जा
कि चलो उठो इन्हीं के वास्ते एक सौदा करने
और इस सौदे में मुहब्बत के लिए तैयार हो
जंग में मैं भी हारने को हूँ तुम जी उठो सही
गफलत भी हो तो भी नाराजगी जाहिर न कर
तेरे साथ ही यह भी है कि इस तरह की कोई बात नहीं
तेरे साथ ही यह भी है कि यह सब कुछ मुझे याद नहीं
आओ न इक बार फिर से मुहब्बत का कहना मान लें
चलो एक बार फिर से एक दूजे में खो जाएं
चलो फिर से एक बार एक दूजे का नाम लें
रूठ कर जाना कोई हासिल नहीं
मौत को मनाना कोई मुश्किल नहीं
चलो तुम मान जाओ तो मना लेंगे सब
चलो एक बार फिर से अपनी बात ठान लो
चलो दिल्ली में एक बार फिर से शुरू हो रहे हैं विचार
चलो दिल्ली के दिल में उतर कर दिखा दें एक बार
याद है वो सुब्ह निज़ाम ख़ास की बात
मेरे पास गुलों के दस्ते और सामने आप
एक गुलजार शाम के मिलने का मौका
वो वादा पूरा नहीं हो पाया था कि क्या
एक चलती हैरानी ने अपनी दस्तक में बुलाया
और आप के कदमों का ठिकाना मुल्तवी हुआ
मैं ने अपने एक बयान में कहा कि इस तरह
आपकी बात से सहमत नहीं तो क्या हुआ
चल दिये छोड़ कर कदम मेरे साथ नहीं हैं
क्या कहेंगे लोग कि मुद्दतों बाद भी वफ़ा नहीं
चलो इक आग है लगी हुई मेरी जान से ज्यादा
बुझा दें तो ये भी शामिल हो कि आपके ऐब में
आप ने ही तो कहा था कि दिए हैं जलने दो
बस्तियाँ इनसे रौशन हैं तो जलने दो लोगों
मोहब्बत इनसे जिंदा है तो उसे इस तरह जलने दो
जलने दो हजार वर्ष तक कि आँच रहे सनद है कि
तुमने उजालों के गीत गाते हुए कहा था कि जिंदा हैं
तो कभी नहीं बुझे ये रौशनी के लिए एक दिया ही है
बहुत कुछ सीखने के बाद भी नहीं हो
तो कैसा लगता है मुझे क्या क्या कहें
देखो कितने दिए जलाए आप की मुहब्बत ने
सब हैं मगर यह भी है कि आप का एतराज है
ऐतबार है या इख्तियार है कि इस तरह न हो
शिकायत की बात करने के लिये आप आए न
आइए देखें कि वे इस तरह की कोई बात पर कायम न हो जाए और इस तरह की फरमाइशी मंशा जाहिर न हो
कि हम हैं आप हैं और बस तन्हाई के सिवा और कोई नहीं
अलविदा कहने को लेकर भी सवाल है
आप के जाने को लेकर भी सवाल है
जाइए कौन भला रोके है
मगर कुछ नहीं तो इनके ज़वाब दे जाइए…
जाइए कौन भला रोकने की कोशिश में है
मगर जाने की वजहों पर विचार कर के जाइए…
जाइए क्यूँ चाहे आपको इस तरह रोक ले
मगर मुहब्बत का पूरा हिसाब करके जाइए..
अनिल पुष्कर
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